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दसऱ्याचे महत्त्व
दसरा हा भारतातील एक अत्यंत महत्त्वाचा आणि लोकप्रिय सण आहे. याला विजयादशमी असेही म्हणतात, कारण हा दिवस विजयाचा आणि सत्याच्या अधर्मावर विजयाचा प्रतीक मानला जातो. दसऱ्याचा सण विविध सांस्कृतिक आणि धार्मिक परंपरांमध्ये महत्त्वपूर्ण स्थान मिळवतो, विशेषत: महाराष्ट्रात. दसऱ्याला विजयादशमी असेही म्हणतात, ज्याचा अर्थ “विजयाचा दहावा दिवस” आहे. दसऱ्याचे महत्त्व: सांस्कृतिक महत्त्व: दसरा…
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नवरात्रि का नौवां दिन : माँ सिद्धिदात्री का महत्व
नवरात्रि का नौवां दिन : माँ सिद्धिदात्री का महत्व नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माँ सिद्धिदात्री, माँ दुर्गा का अंतिम स्वरूप हैं, और वे भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियाँ (अलौकिक शक्तियाँ) प्रदान करती हैं। ‘सिद्धि’ का अर्थ है विशेष उपलब्धियाँ और…
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नवरात्रि का आठवां दिन: माँ महागौरी का महत्व
नवरात्रि का आठवां दिन: माँ महागौरी का महत्व नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। माँ महागौरी को शांति, पवित्रता, और करुणा का प्रतीक माना जाता है। उनका यह स्वरूप अत्यंत सौम्य और शांत है, और वे भक्तों को सुख, शांति, और सभी प्रकार के पापों…
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नवरात्रि का सातवां दिन : माँ कालरात्रि का महत्व
नवरात्रि का सातवां दिन : माँ कालरात्रि का महत्व नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। माँ कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत उग्र और शक्तिशाली है, जो दुष्टों और अज्ञानता का नाश करती हैं। उन्हें काल या समय की रात्रि के रूप में जाना जाता है, और…
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नवरात्रि का छठा दिन : माँ कात्यायनी का महत्व
नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। माँ कात्यायनी को शक्ति और वीरता की देवी माना जाता है। उनके इस स्वरूप में उन्हें युद्ध और साहस की देवी कहा जाता है, जो दुष्टों का संहार करती हैं और धर्म की रक्षा करती हैं। उनका नाम महर्षि…
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नवरात्रि का पांचवा दिन: माँ स्कंदमाता का महत्व
नवरात्रि का पांचवा दिन: माँ स्कंदमाता का महत्व नवरात्रि के पांचवे दिन देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है। माँ स्कंदमाता, भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, इसलिए उन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। स्कंदमाता को प्रेम, मातृत्व, और शांति का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा से…
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नवरात्रि का चौथा दिन: माँ कूष्माण्डा का महत्व
नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा की पूजा का विधान होता है। माँ कूष्माण्डा को सृष्टि की रचयिता और ब्रह्मांड की उत्पत्तिकर्ता माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और हर जगह अंधकार फैला हुआ था, तब देवी कूष्माण्डा ने अपनी हल्की मुस्कान…
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नवरात्रि का तीसरा दिन: माँ चंद्रघंटा की पूजा और महत्व
नवरात्रि का तीसरा दिन: माँ चंद्रघंटा की पूजा और महत्व नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माँ चंद्रघंटा का यह स्वरूप शक्ति, साहस और वीरता का प्रतीक है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र की आकृति में घंटे का आकार होता है,…





